टीडीएस वायरलस संवाददाता, गोपालगंज/छपरा/बिहार: स्नातक सत्र 2026-30 में चल रही ऑनलाइन नामांकन प्रक्रिया को लेकर अब छात्र संगठनों ने आवाज उठानी शुरू कर दी है। जन शक्ति छात्र परिषद् ने विश्वविद्यालय प्रशासन से मांग की है कि आवेदन प्रक्रिया में सुधार करते हुए छात्रों के लिए कम से कम पांच महाविद्यालयों का चयन अनिवार्य किया जाए। जन शक्ति छात्र परिषद् (JSCP) का कहना है कि वर्तमान व्यवस्था में केवल 1 कॉलेज का विकल्प भरने पर भी आवेदन स्वीकार किया जा रहा है, जिससे हजारों छात्रों के नामांकन पर संकट उत्पन्न हो सकता है।
जन शक्ति छात्र परिषद् गोपालगंज के अनुसार वर्तमान ऑनलाइन एडमिशन प्रक्रिया में अधिकांश छात्र केवल पुराने और प्रतिष्ठित कॉलेजों को ही प्राथमिकता दे रहे हैं। इसके कारण नवस्थापित राजकीय डिग्री कॉलेजों और ग्रामीण क्षेत्रों के महाविद्यालयों में अपेक्षित संख्या में आवेदन नहीं पहुंच पा रहे हैं। इससे एक तरफ पुराने कॉलेजों पर अत्यधिक दबाव बढ़ रहा है, वहीं दूसरी ओर नए कॉलेजों में सीटें खाली रहने की संभावना भी बढ़ गई है।
जन शक्ति छात्र परिषद् ने कहा कि यदि किसी छात्र का चयन उसके द्वारा चुने गए एकमात्र कॉलेज में नहीं हो पाता है, तो वह स्नातक नामांकन से पूरी तरह वंचित हो सकता है। इसका सीधा असर गरीब, ग्रामीण और कम अंक प्राप्त करने वाले छात्रों पर पड़ेगा। कई छात्र ऐसे हैं जिनके पास दोबारा आवेदन करने या अन्य कॉलेज खोजने के पर्याप्त संसाधन नहीं होते। ऐसे में हजारों विद्यार्थियों का भविष्य प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।
JSCP (जन शक्ति छात्र परिषद्) ने माननीय कुलपति से मांग करते हुए कहा कि आवेदन प्रक्रिया में कम से कम पांच (5) कॉलेजों का विकल्प अनिवार्य किया जाए। इससे छात्रों को वैकल्पिक अवसर मिलेंगे और किसी एक कॉलेज (college) में चयन नहीं होने की स्थिति में दूसरे कॉलेजों में नामांकन की संभावना बनी रहेगी। जन शक्ति छात्र परिषद् का मानना है कि इस कदम से विश्वविद्यालय की नामांकन प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, संतुलित और छात्रहितकारी बन सकेगी।
जन शक्ति छात्र परिषद् के अध्यक्ष ने कहा कि शिक्षा हर छात्र का अधिकार है और केवल विकल्पों की कमी के कारण किसी भी योग्य छात्र को उच्च शिक्षा से वंचित नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन को जल्द से जल्द इस विषय पर गंभीर निर्णय लेना चाहिए ताकि छात्रों का भविष्य सुरक्षित रह सके।
उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान व्यवस्था में ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के छात्र सबसे अधिक प्रभावित हो सकते हैं। कई बार जानकारी के अभाव में छात्र केवल एक प्रसिद्ध कॉलेज का चयन कर देते हैं और मेरिट सूची में नाम नहीं आने पर उनका पूरा शैक्षणिक सत्र प्रभावित हो जाता है। यदि बहुविकल्पीय कॉलेज चयन की व्यवस्था लागू होती है तो अधिक छात्रों का नामांकन सुनिश्चित किया जा सकेगा।
छात्र संगठन ने विश्वविद्यालय प्रशासन से अपील करते हुए कहा कि नई शिक्षा नीति और छात्रहित को ध्यान में रखते हुए तकनीकी और प्रशासनिक स्तर पर तत्काल सुधार किए जाएं। जन शक्ति छात्र परिषद् ने चेतावनी दी कि यदि छात्रों की मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया तो आगे आंदोलन भी किया जा सकता है।
जन शक्ति छात्र परिषद् का मानना है कि बहुविकल्पीय कॉलेज चयन प्रणाली लागू होने से विश्वविद्यालयों में सीटों का संतुलित वितरण होगा और छात्रों को अधिक अवसर मिलेंगे। इससे नए कॉलेजों में भी शैक्षणिक गतिविधियां मजबूत होंगी तथा उच्च शिक्षा का दायरा और व्यापक हो सकेगा।








