गोपालगंज में जीविका दीदियों को मिली बड़ी जिम्मेदारी, अब मध्य विद्यालयों के छात्रों की भी सिलेंगी पोशाक
टीडीएस वायरलस संवाददाता, उचकागांव (गोपालगंज): बिहार के गोपालगंज जिले के उचकागांव प्रखंड के साथी गांव में संचालित जीविका सिलाई सेंटर से जुड़ी महिलाओं के लिए बड़ी खबर सामने आई है। आंगनबाड़ी केंद्रों के बच्चों की पोशाक तैयार करने के बाद अब इसी सेंटर की जीविका दीदियों को जिले के मध्य विद्यालयों के छात्रों की स्कूल यूनिफॉर्म सिलाई की जिम्मेदारी भी दी जाएगी। इससे स्थानीय स्तर पर महिलाओं को रोजगार और आय का अतिरिक्त अवसर मिलने की उम्मीद है।
यश इंटरप्राइजेज के बैनर तले संचालित इस सिलाई सेंटर में करीब 65 जीविका दीदियां रोजाना सिलाई का काम कर रही हैं। अधिकारियों के अनुसार, सेंटर पर प्रतिदिन लगभग 1,000 पोशाक तैयार की जा रही हैं। आंगनबाड़ी बच्चों की पोशाक का काम पूरा होने के बाद मध्य विद्यालयों के छात्रों की पोशाक सिलाई शुरू कराई जाएगी।
2.23 लाख से अधिक आंगनबाड़ी बच्चों की पोशाक का लक्ष्य
जीविका बीपीएम नेहा कुमारी ने बताया कि इस सिलाई सेंटर को गोपालगंज जिले के सभी 14 प्रखंडों के आंगनबाड़ी केंद्रों में पूर्व-प्राथमिक शिक्षा प्राप्त कर रहे 2,23,082 बच्चों की पोशाक तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई थी। अब तक 1,62,900 बच्चों की पोशाक के लिए कपड़ा उपलब्ध कराया जा चुका है। इनमें से 1,43,497 पोशाक तैयार कर उपलब्ध भी कराई जा चुकी हैं। सेंटर पर लगातार सिलाई का काम चल रहा है और शेष पोशाक तैयार करने का कार्य भी तेजी से किया जा रहा है।
जीविका दीदियों की सुविधाओं पर भी रहेगा जोर
सिलाई सेंटर का निरीक्षण करने पहुंचे अधिकारियों ने केवल उत्पादन कार्य की जानकारी ही नहीं ली, बल्कि वहां काम कर रही जीविका दीदियों की सुविधाओं और समस्याओं पर भी चर्चा की। रविवार को बीडीओ मनोज कुमार पंडित, जीविका बीपीएम नेहा कुमारी और एरिया कोऑर्डिनेटर पंकज कुमार ने सेंटर का निरीक्षण किया। इस दौरान अधिकारियों ने सिलाई कार्य में लगी महिलाओं से उनकी समस्याओं के बारे में जानकारी ली।
बीडीओ ने सेंटर पर शुद्ध पेयजल की व्यवस्था के लिए एक सप्ताह के अंदर RO लगाने की बात कही। इसके अलावा कर्मचारियों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए हर महीने एक दिन स्वास्थ्य विभाग की ओर से स्वास्थ्य जांच शिविर आयोजित कराने का निर्णय बताया गया।
स्कूल यूनिफॉर्म सिलाई से बढ़ेंगे रोजगार के अवसर
आंगनबाड़ी बच्चों की पोशाक तैयार करने के बाद मध्य विद्यालयों के छात्रों की पोशाक सिलाई की जिम्मेदारी मिलने से जीविका दीदियों के लिए काम का दायरा बढ़ेगा। इससे ग्रामीण महिलाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार मिलने और उनकी आय में बढ़ोतरी की संभावना है। सरकार की विभिन्न महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण आजीविका योजनाओं के तहत स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है। गोपालगंज का यह सिलाई सेंटर इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है।
गोपालगंज में रोजगार और शिक्षा से जुड़ी बड़ी पहल
साथी गांव के इस सेंटर में आंगनबाड़ी बच्चों की पोशाक तैयार करने का काम बड़े स्तर पर किया जा रहा है। अब मध्य विद्यालयों के छात्रों की यूनिफॉर्म सिलाई शुरू होने से सेंटर की गतिविधियां और बढ़ेंगी। इससे एक तरफ सरकारी स्कूलों के छात्रों के लिए पोशाक तैयार होगी, वहीं दूसरी तरफ जीविका दीदियों को लगातार रोजगार का अवसर मिलता रहेगा।

मुख्य बिंदु:
- 65 जीविका दीदियां सेंटर पर कर रही हैं काम
- रोजाना करीब 1,000 पोशाक तैयार
- 2,23,082 आंगनबाड़ी बच्चों की पोशाक का लक्ष्य
- 1,43,497 पोशाक तैयार कर उपलब्ध
- एक सप्ताह में RO लगाने की योजना
- हर महीने स्वास्थ्य जांच शिविर लगेगा
- इसके बाद मध्य विद्यालयों के छात्रों की पोशाक भी यहीं तैयार होगी
FAQs
Q1. गोपालगंज में जीविका सिलाई सेंटर कहां संचालित हो रहा है?
उचकागांव प्रखंड के साथी गांव में यश इंटरप्राइजेज के बैनर तले जीविका सिलाई सेंटर संचालित हो रहा है।
Q2. सेंटर पर कितनी जीविका दीदियां काम कर रही हैं?
सेंटर पर करीब 65 जीविका दीदियां सिलाई का काम कर रही हैं।
Q3. जीविका दीदियां रोज कितनी पोशाक तैयार करती हैं?
सेंटर पर प्रतिदिन करीब 1,000 पोशाक तैयार की जा रही हैं।
Q4. कितने आंगनबाड़ी बच्चों की पोशाक तैयार करनी है?
गोपालगंज जिले के 14 प्रखंडों के कुल 2,23,082 आंगनबाड़ी बच्चों की पोशाक तैयार करने का लक्ष्य है।
Q5. क्या अब स्कूल के छात्रों की यूनिफॉर्म भी यहीं तैयार होगी?
हां। आंगनबाड़ी बच्चों की पोशाक का काम पूरा होने के बाद मध्य विद्यालयों के छात्रों की पोशाक की सिलाई भी इसी सेंटर से शुरू कराई जाएगी।
Q6. जीविका दीदियों के लिए सेंटर पर क्या नई सुविधाएं मिलेंगी?
एक सप्ताह के अंदर RO लगाने और हर महीने स्वास्थ्य विभाग की ओर से स्वास्थ्य जांच शिविर आयोजित करने की बात कही गई है।









