भोरे (गोपालगंज): पेपर लीक मामले और आंदोलनरत छात्रों पर कथित पुलिस कार्रवाई के विरोध में शनिवार को आइसा और इन्नौस के आह्वान पर आयोजित बिहार बंद का भोरे प्रखंड में मिला-जुला असर देखने को मिला। बंद के दौरान बड़ी संख्या में छात्र और युवा सड़कों पर उतर आए और सरकार के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। हालांकि अधिकांश सरकारी स्कूल, कॉलेज और सरकारी कार्यालय सामान्य दिनों की तरह खुले रहे, जिससे जनजीवन पूरी तरह प्रभावित नहीं हुआ।
प्रदर्शनकारियों का जुलूस खजुरहा मोड़ से शुरू होकर वारलेश मोड़ होते हुए चारमुहानी पहुंचा। यहां नुक्कड़ सभा का आयोजन किया गया, जहां छात्रों और युवाओं ने शिक्षा व्यवस्था में सुधार तथा प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता की मांग को लेकर नारेबाजी की। प्रदर्शन के दौरान सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करते हुए कई मांगें प्रमुखता से उठाई गईं।
सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि लगातार हो रही प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक की घटनाओं से लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित हो रहा है। उन्होंने मांग की कि पेपर लीक की घटनाओं पर सख्ती से रोक लगाई जाए और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो। साथ ही राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) को भंग करने, नई शिक्षा नीति-2020 को वापस लेने तथा छात्र आंदोलनों के दौरान दर्ज सभी मुकदमों को वापस लेने की भी मांग की गई।
प्रदर्शनकारियों ने माले विधायक संदीप सौरभ, भोरे से पूर्व उम्मीदवार धनंजय, आइसा के राज्य सचिव दीपंकर मिश्रा, माले नेता कुमार परवेज समेत गिरफ्तार छात्र नेताओं की तत्काल रिहाई की मांग उठाई। इसके अलावा बीए ऑनर्स में नामांकन के लिए 75 प्रतिशत अंकों की अनिवार्यता समाप्त करने की भी मांग की गई। वक्ताओं का कहना था कि ऐसी शर्तों से बड़ी संख्या में छात्रों को उच्च शिक्षा से वंचित होना पड़ रहा है।
नुक्कड़ सभा को सुबास पटेल, धर्मेंद्र चौहान, अर्जुन सिंह कुशवाहा, प्रभात सिंह, प्रमोद कुशवाहा, रवींद्र सिंह कुशवाहा, कमलेश प्रसाद, राघव प्रसाद सिंह, प्रभावती यादव, विद्या खरवार, इमरान अंसारी, विश्वनाथ गुप्ता, अवध लाल राम, मुकेश कुमार सिंह, रोहित राम, गौतम कुमार राम और रामदेयाल बीन सहित कई नेताओं ने संबोधित किया। वक्ताओं ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार, छात्रों के अधिकारों की रक्षा और पारदर्शी भर्ती एवं परीक्षा प्रणाली के लिए आंदोलन आगे भी जारी रहेगा।

हालांकि बिहार बंद के दौरान बाजारों और परिवहन सेवाओं पर सीमित असर देखने को मिला। अधिकांश शैक्षणिक संस्थान खुले रहे, लेकिन प्रदर्शन के कारण कुछ स्थानों पर आवागमन प्रभावित हुआ। प्रशासन की ओर से स्थिति पर नजर रखी गई और सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए।
छात्र संगठनों का कहना है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। वहीं सरकार की ओर से इस मामले पर आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है।








