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छपरा में शिक्षकों का प्रदर्शन: JPU ने 7 घंटे उपस्थिति आदेश किया रद्द – पढ़े पूरी खबर

On: April 7, 2026 7:52 AM
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बिहार न्यूज़: छपरा से एक खबर सामने आई है, जहां जय प्रकाश विश्वविद्यालय (JPU) से जुड़े शिक्षकों ने 7 घंटे की अनिवार्य उपस्थिति के आदेश के खिलाफ जोरदार धरना-प्रदर्शन किया। शिक्षकों के व्यापक विरोध के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन को झुकना पड़ा और अंततः कुलपति ने इस विवादित आदेश को रद्द कर दिया।

JPU का क्या था पूरा मामला? दरअसल, 1 अप्रैल को विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार द्वारा एक आदेश जारी किया गया था, जिसमें सभी स्नातकोत्तर विभागाध्यक्षों और अंगीभूत कॉलेजों के प्राचार्यों को निर्देश दिया गया था कि वे शिक्षकों की प्रतिदिन कम से कम 7 घंटे की अनिवार्य उपस्थिति सुनिश्चित करें। इस आदेश के सामने आते ही शिक्षकों में भारी आक्रोश फैल गया। शिक्षकों का कहना है कि यह निर्णय न केवल अव्यावहारिक है, बल्कि पूर्व निर्धारित सरकारी नियमों के भी खिलाफ है।

JPU Chhapra News | राजेंद्र कॉलेज में धरना-प्रदर्शन छपरा के प्रसिद्ध राजेंद्र कॉलेज छपरा परिसर में सोमवार को शिक्षकों ने एक दिवसीय धरना आयोजित किया था। इस धरना में बड़ी संख्या में शिक्षक शामिल हुए और उन्होंने आदेश के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद की। धरना कार्यक्रम का आयोजन जेपीयू स्नातकोत्तर शिक्षक संघ द्वारा किया गया था, जिसमें कई वरिष्ठ शिक्षक ने भाग लिया और अपने विचार रखे।

JPU Chhapra News | शिक्षक ने क्या कहा? धरना को संबोधित करते हुए शिक्षक समरेंद्र बहादुर सिंह ने इस आदेश को पूरी तरह अनुचित बताया। उन्होंने कहा कि यह आदेश पटना के लोक भवन सचिवालय द्वारा 1 जुलाई 2016 को जारी दिशा-निर्देशों का उल्लंघन करता है। सरकारी नियम के मुताबिक शिक्षकों की दैनिक उपस्थिति 5 घंटे निर्धारित है साप्ताहिक कार्यभार 40 घंटे तय किया गया है उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि शिक्षक केवल कक्षा लेने तक सीमित नहीं होते, बल्कि वे कई अन्य शैक्षणिक गतिविधियों में भी योगदान देते हैं।

शिक्षकों के कार्यों का दायरा धरना में शामिल शिक्षकों ने बताया कि उनकी जिम्मेदारियां बहुत व्यापक होती हैं, जैसे: प्रश्नपत्र तैयार करना उत्तरपुस्तिकाओं का मूल्यांकन शोध कार्य का निर्देशन पुस्तकालय अध्ययन सेमिनार और संगोष्ठियों में भाग लेना इसलिए केवल उपस्थिति के आधार पर उनकी कार्यक्षमता को मापना गलत है। अन्य प्रमुख शिक्षक भी रहे मौजूद इस विरोध प्रदर्शन में कई प्रमुख शिक्षक और शिक्षाविद भी शामिल हुए, जिनमें:

  • प्रोफेसर रविंद्र सिंह (अध्यक्ष)
  • प्रोफेसर अच्युतानंद सिंह (सचिव)
  • डॉ धर्मेंद्र सिंह
  • डॉ कमाल अहमद

इन सभी ने एक स्वर में आदेश का विरोध किया और इसे वापस लेने की मांग की। लगातार बढ़ते विरोध और शिक्षकों के दबाव के बाद विश्वविद्यालय के कुलपति ने इस आदेश को रद्द करने का फैसला लिया। इस निर्णय के बाद शिक्षकों में राहत और संतोष का माहौल देखा गया। क्यों था यह आदेश विवादित? इस आदेश को लेकर विवाद के मुख्य कारण थे: सरकारी दिशा-निर्देशों के खिलाफ होना, शिक्षकों के कार्य की प्रकृति को नजरअंदाज करना, अकादमिक स्वतंत्रता पर असर पड़ना, प्रशासनिक दबाव बढ़ाना

JPU University Chhapra News

JPU मे ऐसे आदेश शिक्षा व्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं। इससे शिक्षकों का मनोबल गिरता है और शिक्षण गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। हालांकि, आदेश रद्द होने के बाद यह साफ हो गया है कि विश्वविद्यालय प्रशासन को शिक्षकों की बात सुननी होगी और भविष्य में ऐसे निर्णय लेने से पहले व्यापक विचार-विमर्श करना होगा।

Tuntun Singh

मैं टीडीएस वायरलस का संस्थापक हूँ, जो एक गतिशील समाचार मंच है जो खेल, शिक्षा, मनोरंजन, गोपालगंज और अन्य क्षेत्रों की ताज़ा खबरें प्रदान करता है। मैंने टीडीएस वायरलस को विविध पाठकों के लिए एक विश्वसनीय समाचार और सूचना स्रोत के रूप में स्थापित किया है। Tuntun Singh

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