गोपालगंज के नरइनिया गांव में 11 वर्षीय जुड़वा बहनों ने दादी की अर्थी को कंधा दिया और अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी निभाई। पांच साल पहले पिता को भी मुखाग्नि दी थी
गोपालगंज/न्यूज़: मीरगंज के नरइनिया गांव में एक भावुक कर देने वाली घटना सामने आई है। परिवार में पुरुष सदस्य नहीं होने के बावजूद 11 वर्षीय जुड़वा बहनों ने अपनी दादी की अंतिम यात्रा की जिम्मेदारी खुद संभाली। परी श्रीवास्तव और पंखुड़ी श्रीवास्तव ने दादी की अर्थी को कंधा दिया और श्मशान घाट तक पहुंचीं। वहां परी ने दादी को मुखाग्नि दी। आर्थिक परेशानियों से जूझ रहे परिवार की दोनों बेटियों के इस साहस की चर्चा गांव में हो रही है। मुश्किल समय में दोनों बहनों ने जिस तरह आगे बढ़कर जिम्मेदारी निभाई, वह उनके आत्मविश्वास और हिम्मत को दर्शाता है।
जानकारी के अनुसार, दादी के निधन के बाद परिवार में अंतिम संस्कार की तैयारी शुरू हुई। परिवार में कोई पुरुष सदस्य या भाई नहीं होने के कारण अंतिम यात्रा को लेकर स्थिति कठिन थी। स्थानीय लोगों के अनुसार, अंतिम संस्कार में आसपास के लोग मौजूद थे, लेकिन अर्थी को कंधा देने की जिम्मेदारी उठाने की बात आई तो लोग पीछे हटने लगे। इसके बाद दोनों बहनों ने खुद आगे बढ़कर दादी की अर्थी को कंधा दिया।
परी और पंखुड़ी दादी के शव को लेकर श्मशान घाट तक गईं। वहां परी ने दादी का अंतिम संस्कार किया। दोनों बहनों की इस हिम्मत ने आसपास मौजूद लोगों को भावुक कर दिया। इस परिवार के लिए यह पहली ऐसी कठिन परिस्थिति नहीं है। नरइनिया गांव निवासी प्रिंस श्रीवास्तव की करीब पांच वर्ष पहले बीमारी के कारण मौत हो गई थी। उस समय पंखुड़ी की उम्र महज छह वर्ष थी।
बताया गया कि पिता के निधन के बाद पंखुड़ी ने ही उन्हें मुखाग्नि दी थी। अब पांच साल बाद दादी के निधन पर दोनों बहनों ने एक बार फिर परिवार की जिम्मेदारी संभाली। पिता की मौत के बाद परिवार की जिम्मेदारी मां प्रियंका देवी के कंधों पर आ गई। उन्होंने सिलाई-कढ़ाई और मजदूरी करके दोनों बेटियों का पालन-पोषण किया।
आर्थिक स्थिति कमजोर होने के बावजूद प्रियंका देवी ने अपनी बेटियों की पढ़ाई जारी रखी है। उनका कहना है कि मुश्किल परिस्थितियों के बावजूद दोनों बेटियां हिम्मत नहीं हारतीं और परिवार के लिए मजबूती से खड़ी रहती हैं।
परिवार की आर्थिक स्थिति भले ही चुनौतीपूर्ण हो, लेकिन परी और पंखुड़ी ने कठिन समय में जिस तरह जिम्मेदारी निभाई, उसकी गांव में चर्चा हो रही है। दादी की अंतिम यात्रा में दोनों बहनों का आगे आना ग्रामीण समाज में बदलती सोच की तस्वीर भी दिखाता है। यह घटना इस बात का उदाहरण है कि जिम्मेदारी निभाने के लिए केवल उम्र या लिंग नहीं, बल्कि हिम्मत और परिस्थितियों का सामना करने का जज्बा जरूरी होता है।
FAQ
सवाल: गोपालगंज में दादी की अर्थी को किसने कंधा दिया?
जवाब: मीरगंज के नरइनिया गांव में 11 वर्षीय जुड़वा बहनों परी और पंखुड़ी श्रीवास्तव ने अपनी दादी की अर्थी को कंधा दिया।
सवाल: दादी का अंतिम संस्कार किसने किया?
जवाब: उपलब्ध जानकारी के अनुसार, परी श्रीवास्तव ने दादी को मुखाग्नि दी।
सवाल: परी और पंखुड़ी की उम्र कितनी है?
जवाब: दोनों बहनों की उम्र करीब 11 वर्ष बताई गई है।
सवाल: परी और पंखुड़ी के पिता की मौत कब हुई थी?
जवाब: उनके पिता प्रिंस श्रीवास्तव की करीब पांच वर्ष पहले बीमारी से मौत हुई थी।
सवाल: पिता की मौत के समय परिवार की स्थिति कैसी थी?
जवाब: पिता की मौत के बाद उनकी मां प्रियंका देवी ने सिलाई-कढ़ाई और मजदूरी करके दोनों बेटियों की परवरिश की।








