टीडीएस वायरलस न्यूज़, गोपालगंज/बिहार – गोपालगंज के व्यवहार न्यायालय में जदयू विधायक अमरेंद्र कुमार पांडेय उर्फ पप्पू पांडेय, उनके भाई सतीश पांडेय और सीए राहुल तिवारी से जुड़े हाई-प्रोफाइल मामले में बड़ा कानूनी मोड़ सामने आया है। बुधवार को एडीजे-3 की अदालत में जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने पुलिस कार्रवाई और एफआईआर की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल उठाए।
इस मामले में पटना हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता नरेश दीक्षित और गोपालगंज सिविल कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता राजेश कुमार पाठक ने बचाव पक्ष की ओर से पैरवी की। उन्होंने अदालत में दलील दी कि यह मामला पूरी तरह राजनीतिक साजिश के तहत दर्ज किया गया है।
बचाव पक्ष ने कोर्ट में बताया कि गिरफ्तारी मेमो, जब्ती सूची और एफआईआर दर्ज होने के समय में भारी अंतर है। यह विरोधाभास पुलिस की पूरी कहानी पर सवाल खड़ा करता है। अधिवक्ता नरेश दीक्षित ने कहा कि पुलिस के दस्तावेज ही एक-दूसरे से मेल नहीं खाते, जिससे यह साफ संकेत मिलता है कि मामला कागजों पर गढ़ा गया हो सकता है।
मीडिया से बातचीत में दीक्षित ने कहा कि एफआईआर के समय और गिरफ्तारी रिकॉर्ड में ‘हेरफेर’ की आशंका है। उन्होंने दावा किया कि पुलिस ने जो रिकॉर्ड तैयार किया, वही अब उसकी कहानी को कमजोर कर रहा है।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद एडीजे-3 की अदालत ने मामले को ‘ऑर्डर’ पर रख दिया है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 28 अप्रैल को होगी, जहां यह तय होगा कि आरोपियों को राहत मिलेगी या कानूनी शिकंजा और कसेगा। चूंकि इस केस में सत्ताधारी दल के विधायक और उनके करीबी शामिल हैं, इसलिए यह मामला राजनीतिक गलियारों में चर्चा का केंद्र बन गया है। गैर-जमानती वारंट जारी होने के बाद से ही यह मामला और अधिक संवेदनशील हो गया है।










