Ganna Supply Agreement: 1964 के समझौते की समीक्षा की मांग, बिहार से यूपी गया 95,800 टन गन्ना
गोपालगंज न्यूज़। बिहार के सीमावर्ती इलाकों से उत्तर प्रदेश की चीनी मिलों को बड़े पैमाने पर गन्ना भेजे जाने को लेकर राज्य के चीनी उद्योग में कच्चे माल की कमी की चिंता बढ़ गई है। बिहार विधानसभा के उप मुख्य सचेतक मंजीत कुमार सिंह ने गन्ना उद्योग विभाग के मंत्री संजय कुमार से मुलाकात कर इस मुद्दे पर पत्र सौंपा है। उन्होंने वर्ष 1964 के बिहार-उत्तर प्रदेश गन्ना आपूर्ति समझौते की मौजूदा परिस्थितियों में पुनर्समीक्षा करने की मांग की है।
पत्र में कहा गया है कि उत्तर प्रदेश की सीमावर्ती चीनी मिलें बिहार के सीमावर्ती क्षेत्रों से लगातार बड़ी मात्रा में गन्ने की खरीद कर रही हैं। इससे बिहार की अपनी चीनी मिलों को पर्याप्त कच्चा माल मिलने में परेशानी हो सकती है। मामला केवल चीनी उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे किसानों, रोजगार, औद्योगिक गतिविधियों और राज्य के राजस्व पर भी असर पड़ने की आशंका जताई गई है।
Gopalganj Ganna News – बिहार से यूपी गया 9.58 लाख क्विंटल गन्ना पत्र में उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, बिहार से उत्तर प्रदेश की प्रतापपुर चीनी मिल को 7.20 लाख क्विंटल और हाटा चीनी मिल को 2.38 लाख क्विंटल गन्ने की आपूर्ति हुई। दोनों मिलों को मिलाकर कुल 9.58 लाख क्विंटल गन्ना बिहार से उत्तर प्रदेश गया। यानी करीब 95,800 टन गन्ना राज्य की औद्योगिक सीमा से बाहर गया। पत्र में चिंता जताई गई है कि उच्च गुणवत्ता वाले इस गन्ने का बड़ा हिस्सा यदि बिहार की चीनी मिलों को उपलब्ध हो तो राज्य की मिलों की पेराई क्षमता और औद्योगिक गतिविधियों को मजबूत किया जा सकता है।
Bihar Gopalganj Ganna News 1964 के समझौते की फिर से समीक्षा की मांग, Gopalganj Ganna News – मंजीत कुमार सिंह ने अपने पत्र में 3 फरवरी 1964 के अंतरराज्यीय समझौते का हवाला दिया है। इसके तहत तत्कालीन सारण जिले के 208 गांवों को प्रतापपुर चीनी मिल के लिए गन्ना आपूर्ति क्षेत्र के रूप में आरक्षित किए जाने की बात कही गई है।
पत्र में वर्ष 1995 में उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा अपनी सीमा के भीतर बिहार की चीनी मिलों के लिए आरक्षित गन्ना क्षेत्र को समाप्त किए जाने का भी उल्लेख है। साथ ही वर्ष 1966 में बिहार सरकार के आदेश संख्या 3088 के माध्यम से 208 गांवों को प्रतापपुर चीनी मिल के लिए आरक्षित किए जाने की जानकारी दी गई है। अब बदलती आर्थिक और औद्योगिक परिस्थितियों को देखते हुए इस पुरानी व्यवस्था की समीक्षा की मांग उठाई गई है।
बिहार की चीनी मिलों पर ‘नो-केन’ का खतरा, Gopalganj Ganna News – गन्ना उद्योग के लिए सबसे बड़ी चिंता पर्याप्त कच्चे माल की उपलब्धता है। यदि बिहार की चीनी मिलों को उनकी स्थापित क्षमता के अनुसार गन्ना नहीं मिलता है तो उनकी पेराई अवधि कम हो सकती है। इससे मिलों की उत्पादन क्षमता प्रभावित होने के साथ ‘नो-केन’ जैसी स्थिति पैदा होने की आशंका है।
चीनी मिलों में गन्ने से केवल चीनी ही नहीं बनाई जाती। आधुनिक मिलों में गन्ने से जुड़े उत्पादों के जरिए इथेनॉल उत्पादन और को-जनरेशन से बिजली उत्पादन जैसी गतिविधियां भी होती हैं। इसलिए गन्ने की उपलब्धता कम होने का असर पूरे औद्योगिक इकोसिस्टम पर पड़ सकता है।
किसानों और रोजगार पर भी असर, Gopalganj Ganna News – पत्र में कहा गया है कि गन्ने की खरीद राज्य से बाहर होने का प्रभाव किसानों और चीनी मिलों के अलावा स्थानीय अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है। चीनी मिलों के आसपास परिवहन, श्रमिकों, कृषि सेवाओं और अन्य सहायक कारोबार को भी गन्ना आधारित उद्योग से रोजगार मिलता है।यदि बिहार की मिलों को पर्याप्त गन्ना नहीं मिलता है तो उत्पादन घटने के साथ स्थानीय रोजगार और औद्योगिक गतिविधियों पर भी दबाव बढ़ सकता है। वहीं राज्य के राजस्व हितों पर भी संभावित असर को लेकर चिंता जताई गई है।

Gopalganj Ganna News सरकार से क्या मांग की गई? विधानसभा के उप मुख्य सचेतक ने सरकार से वर्तमान गन्ना आपूर्ति व्यवस्था का नए सिरे से मूल्यांकन करने और 1964 के समझौते की मौजूदा परिस्थितियों के अनुसार समीक्षा करने की मांग की है।मुद्दा यह है कि बिहार के किसानों को उनके गन्ने का बेहतर बाजार मिले, राज्य की चीनी मिलों को पर्याप्त कच्चा माल उपलब्ध हो और स्थानीय स्तर पर रोजगार तथा औद्योगिक गतिविधियां मजबूत हों। आने वाले समय में सरकार इस मांग पर क्या निर्णय लेती है, इस पर बिहार के गन्ना किसानों और चीनी उद्योग की नजर रहेगी।
FAQ – Gopalganj Ganna News
1. बिहार से यूपी कितना गन्ना गया?
उपलब्ध पत्र के आंकड़ों के अनुसार प्रतापपुर और हाटा चीनी मिलों को मिलाकर बिहार से 9.58 लाख क्विंटल, यानी करीब 95,800 टन गन्ना गया।
2. सबसे ज्यादा गन्ना किस चीनी मिल को गया?
प्रतापपुर चीनी मिल को करीब 7.20 लाख क्विंटल गन्ने की आपूर्ति का उल्लेख किया गया है।
3. 1964 के समझौते में कितने गांव शामिल थे?
पत्र के अनुसार तत्कालीन सारण जिले के 208 गांवों को प्रतापपुर चीनी मिल के लिए गन्ना आपूर्ति क्षेत्र के रूप में आरक्षित किया गया था।
4. बिहार की चीनी मिलों को क्या नुकसान हो सकता है?
गन्ने की कमी होने पर मिलें अपनी स्थापित क्षमता के अनुरूप नहीं चल सकती हैं और उनकी पेराई अवधि कम होने का खतरा है।
5. गन्ने से चीनी के अलावा क्या बनता है?
आधुनिक चीनी मिलों में गन्ने से चीनी के अलावा इथेनॉल और को-जनरेशन के जरिए बिजली का उत्पादन भी किया जाता है।
6. सरकार से क्या मांग की गई है?
1964 के बिहार-उत्तर प्रदेश गन्ना आपूर्ति समझौते और वर्तमान गन्ना आपूर्ति व्यवस्था की समीक्षा कर बिहार के किसानों, चीनी मिलों, रोजगार और राजस्व हितों की रक्षा करने की मांग की गई है।










