Gopalganj Land Dispute Verdict: 61 साल पुराने 14.5 बीघा जमीन विवाद पर कोर्ट का फैसला, तीन पीढ़ियों बाद मिला न्याय
टीडीएस वायरलस संवाददाता, गोपालगंज/न्यूज़ – बिहार के गोपालगंज जिले में पिछले 61 वर्षों से चल रहे 14.5 बीघा जमीन विवाद का आखिरकार पटाक्षेप हो गया है। जिला जज-10 राजेश कुमार वर्मा की अदालत ने शनिवार को ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए अपीलकर्ता का दावा खारिज कर दिया। अदालत ने अपने निर्णय में स्पष्ट किया कि संबंधित भूमि, घर और दालान का बंटवारा पूर्वजों द्वारा पहले ही वैध तरीके से किया जा चुका था। इस फैसले के साथ तीन पीढ़ियों तक चली कानूनी लड़ाई का अंत हो गया।
30 दिनों में पूरी हुई सुनवाई
Gopalganj Land Dispute Verdict – जानकारी के अनुसार, यह मामला प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश गीता गुप्ता के संज्ञान में आने के बाद जिला जज-3 की अदालत से स्थानांतरित कर जिला जज-10 की अदालत को सौंपा गया था। अदालत को मामले के शीघ्र निपटारे का निर्देश दिया गया था। इसके बाद लगातार 30 दिनों तक सुनवाई चली और सभी पक्षों की दलीलों, दस्तावेजों तथा साक्ष्यों का गहन परीक्षण किया गया।
1965 में दायर हुआ था मुकदमा – Gopalganj Land Dispute Verdict
यह विवाद श्रीपुर थाना क्षेत्र के राजपुर गांव (Gopalganj Land Dispute Verdict Rajapur Gaw) की 14.5 बीघा जमीन, घर और दालान से जुड़ा था। गांव के चार भाइयों—छठु पाल, नेमधारी पाल, रेखा पाल और प्रीत पाल—ने आपसी सहमति से संपत्ति का बंटवारा कर लिया था। हालांकि, नेमधारी पाल की मृत्यु के बाद उनके पुत्र रामअवतार रावत ने वर्ष 1965 में छपरा की अदालत में टाइटिल सूट संख्या 59/1965 दायर कर जमीन पर दावा किया। बाद में यह मामला अपील के माध्यम से जिला न्यायालय पहुंचा, जहां ट्रायल संख्या 230/1971 के रूप में इसकी सुनवाई शुरू हुई।
तीन पीढ़ियों तक चली कानूनी लड़ाई
Gopalganj Land Dispute Verdict – यह मुकदमा इतना लंबा चला कि इसके मूल पक्षकारों सहित दूसरी पीढ़ी के कई सदस्य न्याय मिलने से पहले ही दुनिया छोड़ गए। इसके बावजूद परिवारों ने हार नहीं मानी और तीसरी पीढ़ी ने अदालत में कानूनी लड़ाई जारी रखी। वर्तमान में जिरजोधन पाल, राजबली पाल, कुसुम देवी, मायापति देवी, जितेंद्र पाल, देवनंदन पाल, गीता देवी और सीमा देवी सहित कई लोग इस मुकदमे में पक्षकार थे। वहीं दूसरे पक्ष से वासुदेव पाल, नगीना पाल, बैरिस्टर पाल, हरेराम पाल समेत अन्य लोग न्यायालय में अपनी दावेदारी पेश कर रहे थे।
Gopalganj Land Dispute Verdict – कोर्ट ने क्या कहा?
सुनवाई के दौरान अपीलकर्ता की ओर से अधिवक्ता बच्चा सिंह, जितेंद्र सिंह और मनोज सिंह ने बहस की। वहीं बचाव पक्ष की ओर से वरीय अधिवक्ता महानंद मिश्र और शैलेंद्र बहादुर मिश्र ने पक्ष रखा। सभी दस्तावेजों, गवाहों और उपलब्ध साक्ष्यों की समीक्षा के बाद अदालत ने माना कि संपत्ति का वैध बंटवारा पूर्वजों द्वारा पहले ही किया जा चुका था। इसलिए अपीलकर्ता का दावा न्यायसंगत नहीं पाया गया। इसी आधार पर अदालत ने अपील को खारिज कर दिया।
Gopalganj Land Dispute Verdict – फैसले के बाद भावुक हुए परिवार

करीब छह दशक तक चले इस विवाद के समाप्त होने के बाद विजयी पक्ष के परिवारों में खुशी का माहौल है। अदालत का फैसला सुनते ही कई लोगों की आंखों में खुशी के आंसू आ गए। परिवार के सदस्यों ने इसे न्यायपालिका पर विश्वास की जीत बताया और कहा कि भले ही न्याय मिलने में लंबा समय लगा, लेकिन आखिरकार सच की जीत हुई। यह फैसला गोपालगंज के सबसे पुराने भूमि विवाद मामलों में से एक माना गया है और लंबे समय से लंबित मुकदमों के त्वरित निपटारे की दिशा में एक महत्वपूर्ण उदाहरण बनकर सामने आया है।







