गोपालगंज। शहर के एसएस बालिका उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के परीक्षा भवन सभागार में बुधवार को गोपालगंज अनुमंडल स्तरीय राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस-2026 की उन्मुखीकरण कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच, नवाचार, अनुसंधान और समस्या समाधान की क्षमता विकसित करना था। इस दौरान विज्ञान शिक्षकों को राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस की रूपरेखा, उद्देश्य और विभिन्न गतिविधियों की विस्तृत जानकारी दी गई।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि आज के विद्यार्थी ही भविष्य के वैज्ञानिक और नवप्रवर्तक हैं। यदि बच्चों में बचपन से वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित किया जाए, तो वे समाज, पर्यावरण और तकनीक से जुड़ी चुनौतियों का प्रभावी समाधान खोज सकते हैं। शिक्षकों से विद्यार्थियों को शोध आधारित शिक्षा के लिए प्रेरित करने का भी आग्रह किया गया।
कार्यशाला का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। इस अवसर पर विद्यालय के प्रधानाचार्य उमेश चंद कुशवाहा, क्षेत्रीय समन्वयक मनोज कुमार सिंह, संयुक्त समन्वयक डॉ. राजकिशोर प्रसाद, मुख्य साधन सेवी अजनी नंदन पांडेय, डॉ. जयप्रकाश शर्मा, कमला राय कॉलेज की प्राध्यापक डॉ. (प्रो.) डेजी कुमारी तथा जिला समन्वयक विवेकानंद प्रसाद सहित बड़ी संख्या में विज्ञान शिक्षक उपस्थित रहे।
कार्यशाला में विशेषज्ञों ने कहा कि जलवायु परिवर्तन, पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छ ऊर्जा, जल संकट और सामाजिक समस्याओं के समाधान में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी की महत्वपूर्ण भूमिका है। शिक्षकों से अपील की गई कि वे विद्यार्थियों को केवल किताबों तक सीमित न रखें, बल्कि उन्हें अपने आसपास की समस्याओं का वैज्ञानिक विश्लेषण कर समाधान खोजने के लिए प्रेरित करें।
वक्ताओं ने बताया कि राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस विद्यार्थियों को अपनी रचनात्मक सोच, वैज्ञानिक प्रतिभा और नवाचार प्रस्तुत करने का राष्ट्रीय स्तर का मंच उपलब्ध कराती है। इससे बच्चों में अनुसंधान की रुचि बढ़ती है और विज्ञान के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित होता है।
प्रधानाचार्य उमेश चंद कुशवाहा ने कहा कि विज्ञान केवल एक विषय नहीं, बल्कि समाज और जीवन को बेहतर बनाने का सशक्त माध्यम है। उन्होंने विज्ञान शिक्षा को हर विद्यार्थी तक पहुंचाने और वैज्ञानिक सोच विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया।
जिला समन्वयक विवेकानंद प्रसाद ने सभी प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि कार्यशाला में मिली जानकारी को विद्यालय स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू किया जाए। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों की जिज्ञासा, रचनात्मकता और शोध क्षमता को प्रोत्साहित करके ही राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस के उद्देश्यों को सफल बनाया जा सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की कार्यशालाएं विद्यार्थियों को भविष्य की वैज्ञानिक चुनौतियों के लिए तैयार करने के साथ-साथ उन्हें नवाचार और अनुसंधान की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर प्रदान करती हैं। इससे आने वाले समय में समाज और देश को नई सोच वाले युवा वैज्ञानिक मिल सकेंगे।





