पंचदेवरी प्रखंड में 46.35 करोड़ की लागत से 520 बेड का ओबीसी कन्या आवासीय विद्यालय तैयार, 2026 की शुरुआत में बेटियों को बड़ी सौगात
टीडीएस वायरल न्यूज़: बिहार के गोपालगंज जिले में बालिका शिक्षा और सशक्तिकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया गया है। नए वर्ष 2026 की शुरुआत जिले की बेटियों के लिए बड़ी खुशखबरी लेकर आई है।
पंचदेवरी प्रखंड में 46 करोड़ 35 लाख रुपये की लागत से निर्मित 520 बेड क्षमता वाला पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) कन्या आवासीय +2 विद्यालय पूरी तरह तैयार होकर शिक्षा विभाग को सौंप दिया गया है।
इस अत्याधुनिक आवासीय विद्यालय के शुरू होने से न केवल गोपालगंज, बल्कि आसपास के ग्रामीण और पिछड़े इलाकों की हजारों छात्राओं को सीधा लाभ मिलने वाला है।
भवन निर्माण विभाग द्वारा निर्मित इस भव्य शैक्षणिक परिसर को खासतौर पर उन छात्राओं को ध्यान में रखकर विकसित किया गया है, जिन्हें संसाधनों की कमी, दूरी और सुरक्षा कारणों से उच्च शिक्षा में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था।
विभाग के कार्यपालक अभियंता रबीन्द्र कुमार ने जानकारी देते हुए बताया कि इस परियोजना को आधुनिक मानकों के अनुरूप तैयार किया गया है और इसके निर्माण में कुल 46.35 करोड़ रुपये की लागत आई है।
उन्होंने कहा कि यह भवन संरचना गुणवत्ता, सुरक्षा और सुविधा—तीनों दृष्टियों से राज्य स्तर की एक आदर्श परियोजना है।
यह ओबीसी कन्या आवासीय विद्यालय ग्रामीण क्षेत्रों की बेटियों के लिए शिक्षा का नया द्वार खोलेगा। विद्यालय परिसर में 520 छात्राओं के लिए सुरक्षित और सुविधायुक्त छात्रावास की व्यवस्था की गई है।
इसके साथ ही स्मार्ट और डिजिटल क्लासरूम, अत्याधुनिक विज्ञान प्रयोगशालाएं, कंप्यूटर लैब, समृद्ध पुस्तकालय, खेलकूद के मैदान, स्वच्छ पेयजल, भोजनालय और स्वास्थ्य से जुड़ी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। इन सुविधाओं के जरिए छात्राओं को गुणवत्तापूर्ण और समग्र शिक्षा का वातावरण मिलेगा।
अब तक पंचदेवरी और आसपास के क्षेत्रों की कई छात्राओं को +2 स्तर की पढ़ाई के लिए गोपालगंज शहर या अन्य दूर-दराज के स्थानों पर जाना पड़ता था। इससे न केवल आर्थिक बोझ बढ़ता था, बल्कि सुरक्षा और समय की समस्या भी सामने आती थी।
इस आवासीय विद्यालय के शुरू होने से छात्राएं अपने ही जिले में रहकर इंटरमीडिएट तक की पढ़ाई कर सकेंगी। इससे शिक्षा में निरंतरता आएगी और ड्रॉपआउट दर में भी कमी आने की उम्मीद है।
इस परियोजना को लेकर जिलाधिकारी पवन कुमार सिन्हा ने इसे जिले की बेटियों के लिए “मील का पत्थर” बताया है। उन्होंने कहा कि छात्रावास की सुविधा मिलने से छात्राओं को रोजाना लंबी दूरी तय नहीं करनी पड़ेगी।
इससे उनका समय और ऊर्जा दोनों बचेंगे, जिसे वे पढ़ाई, खेलकूद और कौशल विकास में बेहतर तरीके से उपयोग कर सकेंगी। उन्होंने यह भी कहा कि यह विद्यालय एक सुरक्षित, अनुशासित और प्रेरणादायक शैक्षिक वातावरण प्रदान करेगा, जहां छात्राएं आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ सकेंगी।
गौरतलब है कि यह ओबीसी कन्या आवासीय विद्यालय मुख्यमंत्री के उस व्यापक विजन का हिस्सा है, जिसके तहत बिहार में बालिका शिक्षा, सुरक्षा और सशक्तिकरण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है।
राज्य सरकार का स्पष्ट लक्ष्य है कि आर्थिक, सामाजिक या भौगोलिक कारणों से कोई भी बेटी शिक्षा से वंचित न रहे। इसी सोच के तहत पिछड़ा वर्ग की छात्राओं के लिए यह विशेष आवासीय +2 विद्यालय स्थापित किया गया है, ताकि वे समान अवसर के साथ शिक्षा प्राप्त कर सकें।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के आवासीय विद्यालय न केवल शैक्षणिक स्तर को ऊंचा उठाते हैं, बल्कि समाज में बेटियों के प्रति सकारात्मक सोच को भी मजबूत करते हैं। जब ग्रामीण क्षेत्रों की छात्राओं को सुरक्षित वातावरण में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलती है,
तो वे आगे चलकर समाज और राज्य के विकास में अहम भूमिका निभाती हैं। यह विद्यालय भविष्य में डॉक्टर, इंजीनियर, शिक्षक, प्रशासनिक अधिकारी और विभिन्न क्षेत्रों में नेतृत्व करने वाली बेटियों की नींव तैयार करेगा।
स्थानीय लोगों और अभिभावकों में भी इस विद्यालय को लेकर उत्साह देखा जा रहा है। उनका कहना है कि यह संस्थान क्षेत्र की तस्वीर बदलने वाला साबित होगा। बेटियों की शिक्षा को लेकर जो सपने अब तक अधूरे रह जाते थे, उन्हें अब नई उड़ान मिलेगी।
कुल मिलाकर, गोपालगंज के पंचदेवरी में तैयार हुआ 520 बेड का ओबीसी कन्या आवासीय +2 विद्यालय शिक्षा के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि है।
46.35 करोड़ की इस महत्वाकांक्षी परियोजना के जरिए सरकार ने यह स्पष्ट संदेश दिया है कि बेटियों की शिक्षा और सशक्तिकरण ही राज्य के उज्ज्वल भविष्य की कुंजी है।









