टीडीएस वायरलस न्यूज़, गोपालगंज: बिहार राज्य सरकार द्वारा निजी विद्यालयों के लिए जारी किए गए नए गजट (नियमावली) को लेकर गोपालगंज जिले में शिक्षा (Education) जगत में जबरदस्त आक्रोश देखने को मिला। निजी स्कूल संचालक अब खुलकर सरकार के फैसले के खिलाफ खड़े हो गए हैं। इसी कड़ी में गोपालगंज शहर के काली स्थान रोड स्थित एक बैठक में प्राइवेट स्कूल्स एंड चिल्ड्रन वेल्फेयर एसोसिएशन के बैनर तले बड़ी संख्या में निजी विद्यालय संचालकों ने हिस्सा लिया और आगे की रणनीति तय की।
बैठक में मौजूद स्कूल (Schools) संचालकों ने एक स्वर में सरकार के नए नियमों को “एकतरफा”, “दमनकारी” और “अव्यावहारिक” करार दिया। उनका आरोप है कि गजट तैयार करते समय न तो निजी स्कूलों से कोई राय ली गई और न ही जमीनी हकीकत को समझने की कोशिश की गई।
क्या है पूरा मामला? बिहार राज्य सरकार ने हाल ही में निजी Schools (विद्यालयों) के संचालन को लेकर एक नई नियमावली (गजट) जारी की है। इस नियमावली में स्कूलों के लिए बुनियादी ढांचे, संसाधनों और प्रशासनिक प्रक्रियाओं से जुड़े कई कड़े प्रावधान शामिल किए गए हैं। निजी स्कूल संचालकों का कहना है कि इन नियमों को लागू करना छोटे और मध्यम स्तर के स्कूलों के लिए लगभग असंभव है। इससे न सिर्फ स्कूलों पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा, बल्कि कई संस्थानों के बंद होने का खतरा भी पैदा हो सकता है।
Schools संचालकों ने लगाया बड़ा आरोप-बैठक में संचालकों ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि: नए गजट में केवल सरकारी हितों को प्राथमिकता दी गई है. निजी स्कूलों की व्यावहारिक समस्याओं को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया है. बिना किसी पूर्व चर्चा या सलाह के नियम थोप दिए गए हैं. छोटे स्कूलों को खत्म करने की साजिश की जा रही है संचालकों ने साफ कहा कि यह नियम शिक्षा सुधार के नाम पर निजी संस्थानों को कमजोर करने का प्रयास है।
नए नियमों के तहत स्कूलों (Schools) को कई महंगे इंफ्रास्ट्रक्चर और सुविधाएं अनिवार्य रूप से लागू करनी होंगी। इसमें भवन मानक, खेल मैदान, डिजिटल सुविधाएं, सुरक्षा इंतजाम आदि शामिल हैं।
संचालकों का कहना है कि: “इन शर्तों को पूरा करने में लाखों रुपये का खर्च आएगा, जो छोटे स्कूलों के लिए संभव नहीं है।” इससे फीस बढ़ाने का दबाव भी बनेगा, जिसका सीधा असर अभिभावकों पर पड़ेगा।
सरकार को सौंपा जाएगा ज्ञापन – बैठक में सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि जल्द ही एक विस्तृत ज्ञापन जिला प्रशासन के माध्यम से मुख्यमंत्री और शिक्षा विभाग को सौंपा जाएगा। इस ज्ञापन में निजी विद्यालयों की समस्याओं और मांगों को विस्तार से रखा जाएगा। संचालकों ने चेतावनी दी है कि अगर सरकार ने उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया, तो वे बड़े स्तर पर आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
एसोसिएशन अध्यक्ष का बयान- एसोसिएशन के अध्यक्ष फैज अहमद ने कहा:“सरकार का यह गजट पूरी तरह एकपक्षीय है। निजी स्कूलों (schools) को लेकर यह गलत धारणा बनाई जाती है कि वे केवल मुनाफा कमाते हैं, जबकि सच्चाई यह है कि वे शिक्षा व्यवस्था की रीढ़ हैं।” उन्होंने आगे कहा कि अगर निजी विद्यालयों को खत्म कर दिया जाए, तो देश की शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह चरमरा जाएगी। निजी विद्यालय देश की शिक्षा प्रणाली में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। खासकर ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में निजी स्कूल ही गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का विकल्प बनते हैं।
अगर नए नियमों के कारण बड़ी संख्या में स्कूल बंद होते हैं, तो: छात्रों की पढ़ाई प्रभावित होगी. सरकारी स्कूलों पर अतिरिक्त दबाव बढ़ेगा. शिक्षा की गुणवत्ता में गिरावट आ सकती है निजी स्कूल संचालकों ने सरकार से मांग की है कि: निजी और सरकारी स्कूलों के लिए समान नीति बनाई जाए. नियम बनाते समय सभी पक्षों से चर्चा की जाए. छोटे स्कूलों के लिए अलग और व्यावहारिक मानक तय किए जाएं, उनका कहना है कि शिक्षा का अधिकार तभी सफल होगा जब सभी संस्थानों के साथ समान और न्यायपूर्ण व्यवहार किया जाएगा।
Schools Vivad Gopalganj News
गोपालगंज में निजी विद्यालयों (Schools) का यह विरोध आने वाले समय में एक बड़े आंदोलन का रूप ले सकता है। सरकार और स्कूल संचालकों के बीच टकराव की स्थिति धीरे-धीरे बनती जाएंगी है। देखना होगा कि सरकार इस मुद्दे पर क्या रुख अपनाती है और क्या निजी स्कूलों की मांगों को कोई राहत मिलती है या नहीं।










