टीडीएस वायरलस न्यूज़, बिहार/किशनगंज – बिहार के सीमावर्ती जिले किशनगंज से एक खबर सामने आई है, जहां अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने बांग्लादेशी घुसपैठ के खिलाफ एक बार फिर व्यापक आंदोलन छेड़ने का ऐलान किया है। यह फैसला किशनगंज के पारसनाथ भवन में आयोजित तीन दिवसीय प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में लिया गया, जो सोमवार को संपन्न हुई।
Abvp किशनगंज ने इस अहम बैठक में राज्य के 36 जिलों से करीब 150 प्रतिनिधियों ने भाग लिया। पिछले तीन दिनों से संगठन के पदाधिकारी और कार्यकर्ता आगामी रणनीतियों और मुद्दों पर गंभीर मंथन कर रहे थे। बैठक के दौरान कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किए गए, जिनमें सबसे प्रमुख प्रस्ताव बांग्लादेशी घुसपैठ के खिलाफ आंदोलन शुरू करने का रहा। पत्रकारों से बातचीत करते हुए ABVP के उत्तर बिहार प्रदेश संगठन मंत्री राकेश मौर्या ने कहा कि सीमावर्ती इलाकों में बांग्लादेश से हो रही अवैध घुसपैठ एक गंभीर राष्ट्रीय चिंता का विषय बन चुकी है।
उन्होंने दावा किया कि इस घुसपैठ के कारण क्षेत्र में जनसंख्या असंतुलन का खतरा बढ़ रहा है और जनसांख्यिकीय बदलाव साफ दिखाई दे रहा है।
राकेश मौर्या ने कहा, “यह केवल स्थानीय समस्या नहीं है, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा है। अगर समय रहते इस पर सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो इसके दूरगामी परिणाम हो सकते हैं।” उन्होंने सरकार से मांग की कि अवैध रूप से रह रहे सभी घुसपैठियों की पहचान कर उन्हें उनके देश वापस भेजा जाए।
ABVP ने इस मुद्दे पर अपने पुराने आंदोलनों का भी जिक्र किया। राकेश मौर्या ने बताया कि साल 2008 में संगठन ने “चलो चिकन नेक रैली” का आयोजन किया था, जिसमें देशभर से 50 हजार से अधिक छात्र-छात्राओं ने भाग लिया था। यह रैली भी बांग्लादेशी घुसपैठ के विरोध में आयोजित की गई थी और उस समय इसने राष्ट्रीय स्तर पर बड़ा प्रभाव डाला था।
संगठन का कहना है कि वह केवल छात्र हितों तक सीमित नहीं है, बल्कि राष्ट्रहित और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर भी लगातार सक्रिय भूमिका निभाता रहा है। आने वाले दिनों में ABVP इस मुद्दे को लेकर बड़े स्तर पर जनजागरूकता अभियान चलाने की योजना बना रहा है, जिसमें रैलियां, धरना-प्रदर्शन और जनसभाएं शामिल हो सकती हैं।
Abvp Kishanganj
सूत्रों के मुताबिक, संगठन जल्द ही आंदोलन की तारीखों और कार्यक्रमों की औपचारिक घोषणा करेगा। साथ ही, यह भी संकेत मिले हैं कि इस बार आंदोलन को पहले से अधिक व्यापक और प्रभावी बनाने की रणनीति तैयार की जा रही है। राजनीतिक और सामाजिक हलकों में ABVP के इस फैसले को लेकर चर्चा तेज हो गई है। जहां एक ओर समर्थक इसे राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जरूरी कदम बता रहे हैं, वहीं विपक्षी दल इस मुद्दे को लेकर सरकार और संगठनों की मंशा पर सवाल उठा सकते हैं।









