टीडीएस वायरलस संवाददाता, टुनटुन सिंह गोपालगंज। बिहार के गोपालगंज जिले के सदर अस्पताल सहित कई सरकारी अस्पतालों में मरीजों को सस्ती जेनरिक दवाओं की बजाय महंगी ब्रांडेड दवाएं लिखे जाने का मामला सामने आया है। मरीजों का आरोप है कि अस्पताल में उपलब्ध दवाओं के बावजूद उन्हें बाहर की मेडिकल दुकानों से महंगी दवाएं खरीदने के लिए कहा जा रहा है। इससे गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है।
मरीजों ने लगाए गंभीर आरोप
थावे प्रखंड के बरारी जगदीश गांव निवासी विनोद कुमार ने बताया कि उनकी पुत्री रचना कुमारी (Rachna Kumari) को लूज मोशन की शिकायत होने पर सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया। जांच के बाद डॉक्टर ने बाहर से ब्रांडेड दवा खरीदने की सलाह दी। इसी तरह वार्ड नंबर 22 के राजेश प्रसाद (Rajesh Prasad) ने आरोप लगाया कि उनकी पत्नी पूनम देवी (Punam Devi) के इलाज के दौरान भी अस्पताल में दवा उपलब्ध होने के बावजूद बाहर की दवा लिखी गई।
कई गुना महंगी पड़ रही हैं दवाएं
Gopalganj Generic Medicine News | मरीजों का कहना है कि जिन दवाओं की जेनरिक कीमत 4 से 20 रुपये के बीच है, वही ब्रांडेड दवाएं 30 रुपये से लेकर 200 रुपये या उससे अधिक कीमत पर खरीदनी पड़ रही हैं। इससे इलाज का खर्च कई गुना बढ़ जाता है और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए इलाज कराना मुश्किल हो जाता है।
जन औषधि केंद्रों का नहीं मिल रहा लाभ
Gopalganj Generic Medicine News | सरकार ने वर्ष 2023 में गोपालगंज जिले के 13 सरकारी अस्पतालों में जन औषधि केंद्र शुरू किए थे ताकि लोगों को कम कीमत पर गुणवत्तापूर्ण जेनरिक दवाएं मिल सकें। हालांकि स्थानीय लोगों का कहना है कि इन केंद्रों का अपेक्षित उपयोग नहीं हो रहा है और अधिकतर मरीजों को बाहर से दवा खरीदनी पड़ती है।
जेनरिक और ब्रांडेड दवाओं में कीमत का बड़ा अंतर
Gopalganj Generic Medicine News | उदाहरण के तौर पर सिप्लोफ्लॉक्स की जेनरिक दवा लगभग 15 रुपये में उपलब्ध है, जबकि ब्रांडेड दवा करीब 120 रुपये तक मिलती है। इसी प्रकार मेटफॉर्मिन, एलबेंडाजोल, क्लोपिडोग्रेल, रेमिप्रिल और अन्य कई दवाओं की कीमतों में भी कई गुना अंतर देखने को मिलता है। यही कारण है कि मरीजों का इलाज पहले की तुलना में अधिक महंगा पड़ रहा है।
Gopalganj Generic Medicine News | डॉक्टरों और दवा कंपनियों पर उठ रहे सवाल
आरोप भी लगाए जा रहे हैं कि कुछ दवा कंपनियां अपने ब्रांड की दवाएं लिखवाने के लिए डॉक्टरों को विभिन्न प्रकार के प्रोत्साहन/पैसा कमीशन देती हैं। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। वहीं केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने भी माना कि सरकारी अस्पतालों (Government Hospital) में अपेक्षा के अनुरूप जेनरिक दवाएं नहीं लिखी जा रही हैं।
ड्रग इंस्पेक्टर ने क्या कहा?
Gopalganj Generic Medicine News | ड्रग इंस्पेक्टर अभय शंकर (Abhay Sankar) के अनुसार जेनरिक और ब्रांडेड दवाओं की गुणवत्ता और प्रभावशीलता में सामान्यतः कोई विशेष अंतर नहीं होता। उनका कहना है कि यदि मरीजों को अनावश्यक रूप से महंगी दवाएं खरीदनी पड़ रही हैं तो यह चिंता का विषय है और इस दिशा में आवश्यक कार्रवाई की जा सकती है।
Gopalganj Generic Medicine News | स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे सवाल

इस पूरे मामले ने सरकारी अस्पतालों की दवा वितरण व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि अस्पतालों में उपलब्ध जेनरिक दवाओं के बजाय मरीजों को बाहर की महंगी दवाएं खरीदनी पड़ती हैं, तो बिहार सरकार की सस्ती दवा उपलब्ध कराने की योजना का उद्देश्य प्रभावित होता है।









