गोपालगंज: बिहार के गोपालगंज जिले से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। जिले के भोरे प्रखंड की 21 युवतियों को कथित तौर पर नौकरी का झांसा देकर एक अंतरराज्यीय साइबर अपराध गिरोह के चंगुल में फंसाया गया था। उत्तर प्रदेश पुलिस की साइबर सेल ने बड़ी कार्रवाई करते हुए देशभर से 250 युवक-युवतियों को मुक्त कराया है। इस मामले में अब तक 19 आरोपितों की गिरफ्तारी की गई है, जबकि अन्य संदिग्धों की तलाश जारी है।
पुलिस के अनुसार, यह कार्रवाई एसीपी के नेतृत्व में की गई, जिसमें कई राज्यों में फैले साइबर नेटवर्क का खुलासा हुआ। जांच एजेंसियों का कहना है कि गिरोह बेरोजगार युवक-युवतियों को अच्छी नौकरी का लालच देकर अपने जाल में फंसाता था और बाद में उन्हें कथित तौर पर साइबर अपराध से जुड़े कार्य करने के लिए मजबूर किया जाता था।
प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि भोरे प्रखंड की कुछ स्थानीय युवतियां कथित तौर पर गिरोह के लिए एजेंट का काम कर रही थीं। आरोप है कि वे ग्रामीण क्षेत्रों की युवतियों को नौकरी दिलाने का भरोसा देकर वाराणसी, लखनऊ और दिल्ली ले जाती थीं। वहां पहुंचने के बाद उन्हें कथित रूप से बंधक बनाकर साइबर अपराध से जुड़े कार्य कराने का दबाव बनाया जाता था। हालांकि पुलिस ने स्पष्ट किया है कि इन सभी आरोपों की विस्तृत जांच जारी है।
मुक्त कराई गई युवतियां भोरे प्रखंड के लुहसी, लामीचौर, बैरौना, पियरौटा समेत अन्य गांवों की रहने वाली बताई गई हैं। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि गिरोह ने अब तक कितने लोगों को इसी तरह अपने जाल में फंसाया है और इसका नेटवर्क किन-किन राज्यों तक फैला हुआ है।
लुहसी गांव की एक पीड़िता (पहचान गोपनीय) ने पुलिस को दिए बयान में बताया कि उसे नौकरी दिलाने के नाम पर वाराणसी बुलाया गया। वहां कथित तौर पर एक फॉर्म भरवाकर सुरक्षा राशि के नाम पर 26 हजार रुपये जमा कराए गए। पीड़िता का आरोप है कि बाद में उसे अन्य युवतियों के साथ एक कमरे में रखा गया और प्रतिदिन संदिग्ध गोली देकर मानसिक रूप से प्रभावित करने का प्रयास किया जाता था। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है।
पुलिस के मुताबिक, कार्रवाई के दौरान गिरोह के सदस्य कुछ युवतियों को वाराणसी से लखनऊ ले गए। वहां मौका मिलते ही युवतियों ने डायल 112 पर कॉल कर अपनी लोकेशन साझा की। सूचना मिलते ही लखनऊ पुलिस ने छापेमारी कर गोपालगंज की 21 युवतियों को सुरक्षित मुक्त कराया। इसके बाद सभी के बयान दर्ज किए गए और आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू की गई।
उत्तर प्रदेश पुलिस से मिले इनपुट के आधार पर गोपालगंज और भोरे पुलिस भी स्थानीय स्तर पर जांच में जुट गई है। जिन लोगों पर युवतियों को नौकरी का झांसा देकर गिरोह तक पहुंचाने का आरोप है, उनकी भूमिका की जांच की जा रही है। पुलिस का कहना है कि साक्ष्यों के आधार पर आगे आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
(नोट: यह समाचार पुलिस द्वारा साझा की गई प्रारंभिक जानकारी और पीड़िताओं के आरोपों पर आधारित है। मामले की जांच जारी है और आरोप अभी न्यायालय में सिद्ध नहीं हुए हैं।)





