Bihar Fertilizer Black Marketing News: यूरिया और DAP की कालाबाज़ारी से किसान परेशान, सरकारी रेट से ₹450 तक वसूली
Bihar Fertilizer Black Marketing: खेती के सबसे महत्वपूर्ण सीजन में किसानों को खाद की कालाबाज़ारी का सामना करना पड़ रहा है। आरोप है कि कई क्षेत्रों में सरकारी निर्धारित कीमत से काफी अधिक दर पर यूरिया और डीएपी (DAP) खाद बेची जा रही है। इससे किसानों में भारी नाराजगी है और प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग की जा रही है।
जानकारी के अनुसार, 45 किलोग्राम यूरिया की सरकारी कीमत लगभग ₹267 निर्धारित है, लेकिन कई दुकानों पर इसे ₹400 से ₹450 तक बेचा जा रहा है। वहीं 50 किलोग्राम DAP की सरकारी कीमत ₹1,350 होने के बावजूद किसानों से ₹1,500 से ₹1,800 तक वसूले जाने के आरोप लगाए जा रहे हैं।
Bihar Fertilizer Black Marketing news | किसानों का कहना है कि खेती की लागत पहले ही लगातार बढ़ रही है। डीजल, बीज, मजदूरी और सिंचाई के बढ़ते खर्च के बीच खाद की महंगी खरीद उनकी आर्थिक स्थिति को और कमजोर कर रही है। कई किसानों का आरोप है कि निर्धारित मूल्य पर खाद उपलब्ध नहीं कराई जा रही, जिससे मजबूरी में उन्हें अधिक कीमत चुकानी पड़ रही है।
सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि यदि सरकार ने खाद की अधिकतम खुदरा कीमत (MRP) तय कर रखी है, तो खुलेआम अधिक कीमत वसूलने वालों पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही? किसानों का कहना है कि संबंधित विभाग और स्थानीय प्रशासन को नियमित निरीक्षण कर दोषी दुकानदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर उचित मूल्य पर खाद उपलब्ध नहीं होने से फसलों की बुआई और उत्पादन दोनों प्रभावित हो सकते हैं। इसका सीधा असर किसानों की आय और कृषि उत्पादन पर पड़ेगा।
किसानों ने सरकार से मांग की है कि सभी अधिकृत खाद विक्रेताओं की जांच कराई जाए, कालाबाज़ारी करने वालों के लाइसेंस रद्द किए जाएं और दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए। साथ ही प्रत्येक जिले में शिकायत हेल्पलाइन और विशेष जांच अभियान चलाकर किसानों को निर्धारित सरकारी दर पर खाद उपलब्ध कराई जाए।

Bihar Fertilizer Black Marketing news | ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों का कहना है कि यदि समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं हुआ तो खेती की लागत और बढ़ेगी, जिसका असर खाद्यान्न उत्पादन पर भी पड़ सकता है। किसानों ने प्रशासन से पारदर्शी वितरण व्यवस्था लागू करने और नियमित निगरानी बढ़ाने की मांग की है।






