JNU Book Discussion Cancelled: उमर खालिद की किताब पर चर्चा रद्द, JNUSU ने लगाया सेंसरशिप का आरोप; ABVP ने फैसले को बताया जीत
नई दिल्ली न्यूज़ : जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में पूर्व छात्र उमर खालिद की किताब “Fractured Communities: Adivasi Histories and the Politics of Power” पर होने वाली चर्चा को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। JNU प्रशासन ने 10 अगस्त को SSS-1 ऑडिटोरियम में प्रस्तावित कार्यक्रम की बुकिंग रद्द कर दी है। इस फैसले के बाद JNU Students’ Union (JNUSU) और विश्वविद्यालय प्रशासन के बीच आरोप-प्रत्यारोप शुरू हो गए हैं।
उमर खालिद वर्तमान में 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगा साजिश मामले में जेल में हैं। प्रस्तावित कार्यक्रम में उनकी किताब पर अकादमिक चर्चा होनी थी। कार्यक्रम में प्रोफेसर प्रभु महापात्रा, प्रोफेसर उमा चक्रवर्ती, शुद्धब्रत सेनगुप्ता, सामाजिक कार्यकर्ता हर्ष मंदर और बानोज्योत्सना सहित कई वक्ताओं के शामिल होने की जानकारी पोस्टर में दी गई थी।
JNU प्रशासन ने क्यों रद्द किया कार्यक्रम?
JNU Book Discussion Cancelled news – JNU प्रशासन के अनुसार, SSS-1 ऑडिटोरियम की बुकिंग इसलिए रद्द की गई क्योंकि कार्यक्रम के बारे में पूरी जानकारी विश्वविद्यालय के सामने नहीं रखी गई थी। विश्वविद्यालय ने कहा कि JNU एक लोकतांत्रिक और विकेंद्रीकृत संस्थान है और कार्यक्रम की अनुमति स्कूल ऑफ सोशल साइंसेज (SSS) के डीन की ओर से दी गई थी।
बाद में डीन ने ही कार्यक्रम के लिए ऑडिटोरियम की बुकिंग रद्द करने की कार्रवाई की।प्रशासन का कहना है कि 10 अगस्त को दोपहर 3 बजे से शाम 6 बजे तक होने वाले कार्यक्रम के बारे में पूरी जानकारी का खुलासा नहीं किया गया था। इसी आधार पर SSS-1 ऑडिटोरियम की बुकिंग रद्द की गई।
JNU Book Discussion Cancelled, JNUSU ने लगाया सेंसरशिप का आरोप
JNU Students’ Union ने प्रशासन के फैसले पर कड़ा विरोध जताया। छात्र संघ ने कहा कि किसी किताब पर चर्चा विश्वविद्यालय की अकादमिक संस्कृति और लोकतांत्रिक संवाद का महत्वपूर्ण हिस्सा है। JNUSU का आरोप है कि कार्यक्रम का आयोजन रोकना विश्वविद्यालय में आलोचनात्मक विचार और असहमति की आवाज को दबाने की कोशिश है।
छात्र संघ ने दावा किया कि जिस प्रारूप में ऑडिटोरियम की बुकिंग की गई थी, उसी प्रारूप में बुकिंग कराने का निर्देश खुद स्कूल ऑफ सोशल साइंसेज के डीन ने दिया था। छात्र संघ ने प्रशासन के इस रुख को विरोधाभासी बताते हुए कहा कि इससे कार्यक्रम रद्द करने के पीछे की मंशा पर सवाल उठते हैं।
JNUSU बोला- कमरा रद्द हुआ, बातचीत नहीं
JNU Book Discussion Cancelled -JNUSU ने स्पष्ट किया कि ऑडिटोरियम की बुकिंग रद्द होने से चर्चा खत्म नहीं होगी। छात्र संघ के मुताबिक, कार्यक्रम विश्वविद्यालय परिसर में ऑडिटोरियम के बाहर आयोजित किया जाएगा। छात्र संघ ने कहा कि कोई भी प्रशासनिक आदेश छात्रों के सोचने, सवाल पूछने और किसी विषय पर चर्चा करने के अधिकार को समाप्त नहीं कर सकता।
JNUSU ने किताब को आदिवासी प्रतिरोध, संघर्ष और जल-जंगल-जमीन से जुड़े मुद्दों पर एक गंभीर अकादमिक कार्य बताया। छात्र संघ ने कार्यक्रम रद्द किए जाने को आदिवासी मुद्दों पर चर्चा को रोकने की कोशिश के रूप में भी पेश किया।
ABVP ने ली कार्यक्रम रद्द होने की जिम्मेदारी
JNU Book Discussion Cancelled -दूसरी ओर, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से संबद्ध अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने कार्यक्रम रद्द होने का स्वागत किया है। ABVP JNU ने दावा किया कि कार्यक्रम का पोस्टर सामने आने के बाद संगठन ने सोशल मीडिया के माध्यम से विश्वविद्यालय प्रशासन के सामने अपनी आपत्ति दर्ज कराई और कार्यक्रम को तत्काल रद्द करने की मांग की। ABVP ने आरोप लगाया कि कार्यक्रम में उमर खालिद को महिमामंडित करने की कोशिश की जा रही थी। संगठन ने प्रशासनिक अधिकारियों के खिलाफ भी विरोध प्रदर्शन किया,
JNU Book Discussion Cancelled – जिन्होंने कार्यक्रम को अनुमति दी थी। ABVP JNU अध्यक्ष मयंक पंचाल ने कहा कि JNU को ऐसे व्यक्ति को महिमामंडित करने का मंच नहीं बनाया जाना चाहिए, जिस पर गंभीर आरोप लगे हैं। उन्होंने कार्यक्रम रद्द होने को ABVP के संघर्ष की जीत बताया।
JNU Book Discussion Cancelled उमर खालिद की किताब को लेकर विवाद
JNU Book Discussion Cancelled Fractured Communities: Adivasi Histories and the Politics of Power के बहाने JNU में अकादमिक स्वतंत्रता, अभिव्यक्ति की आजादी और विश्वविद्यालयों में राजनीतिक विचार-विमर्श को लेकर बहस तेज हो गई है। एक तरफ JNUSU का कहना है कि विश्वविद्यालय में विवादित या आलोचनात्मक विचारों पर भी चर्चा होनी चाहिए। वहीं ABVP का तर्क है कि किसी ऐसे व्यक्ति से जुड़ी किताब के कार्यक्रम को विश्वविद्यालय में मंच नहीं दिया जाना चाहिए, जिस पर गंभीर आपराधिक आरोप हैं। इस पूरे विवाद के बीच 10 अगस्त को प्रस्तावित चर्चा को लेकर अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि JNUSU कार्यक्रम को ऑडिटोरियम के बाहर किस तरह आयोजित करता है और विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से आगे क्या कदम उठाया जाता है।

FAQs – JNU Book Discussion Cancelled
Q1. JNU में कौन सा कार्यक्रम रद्द किया गया है?
JNU में पूर्व छात्र उमर खालिद की किताब Fractured Communities: Adivasi Histories and the Politics of Power पर होने वाली चर्चा के लिए SSS-1 ऑडिटोरियम की बुकिंग रद्द की गई है।
Q2. JNU प्रशासन ने कार्यक्रम क्यों रद्द किया?
JNU प्रशासन के अनुसार कार्यक्रम के बारे में पूरी जानकारी का खुलासा नहीं किया गया था, इसलिए SSS-1 ऑडिटोरियम की बुकिंग रद्द की गई।
Q3. JNUSU ने फैसले पर क्या कहा?
JNUSU ने प्रशासन पर अकादमिक चर्चा और असहमति की आवाज को दबाने का आरोप लगाया और कहा कि ऑडिटोरियम रद्द होने के बावजूद चर्चा जारी रहेगी।
Q4. ABVP ने कार्यक्रम रद्द होने पर क्या कहा?
ABVP JNU ने कार्यक्रम रद्द होने का स्वागत किया और दावा किया कि उसने कार्यक्रम के खिलाफ प्रशासन से लगातार विरोध दर्ज कराया था।
Q5. उमर खालिद की किताब का विषय क्या है?
किताब आदिवासी इतिहास, प्रतिरोध और सत्ता की राजनीति से जुड़े मुद्दों पर केंद्रित बताई गई है।
Q6. कार्यक्रम में कौन-कौन शामिल होने वाले थे?
कार्यक्रम के पोस्टर के अनुसार प्रोफेसर प्रभु महापात्रा, उमा चक्रवर्ती, शुद्धब्रत सेनगुप्ता, हर्ष मंदर और बानोज्योत्सना सहित कई वक्ताओं को शामिल होना था।
Q7. क्या JNUSU कार्यक्रम आयोजित करेगा?
JNUSU ने कहा है कि ऑडिटोरियम की बुकिंग रद्द होने के बावजूद चर्चा को किसी अन्य स्थान, विशेष रूप से परिसर के बाहर खुले स्थान में आयोजित किया जाएगा।











