Pain not having Children
संतान न होने पर महिला का दर्द: ससुराल के ताने, 9:09 मिनट का वायरल वीडियो
Tds viral video News: संतान न होने पर महिला का दर्द एक बार फिर समाज के सामने खुलकर आया है। 9 मिनट 9 सेकंड का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है,
Pain not having Children viral video | जिसमें एक महिला अपनी निजी पीड़ा और ससुराल में मिलने वाले तानों के बारे में भावुक होकर बात कर रही है। वीडियो में महिला बताती है कि उसकी शादी वर्ष 2017 में हुई थी, लेकिन शादी के कई साल बाद भी उसे मां बनने का सुख नहीं मिला।

वीडियो देखने के लिए डाउनलोड लिंक लोग सोशल मीडिया पे बहुत सर्च कर रहे, जिससे ट्रेंडिंग मे आ गया है! महिला का कहना है कि उसके देवर की बेटी 6 साल बाद हुई थी, लेकिन आज वह बड़ी हो चुकी है। उसे देखकर उसके मन में भी मां बनने की इच्छा और गहरी हो जाती है।
वह कहती है कि “बच्चों के बिना जिंदगी अधूरी लगती है” और अगर उसके भी बच्चे होते तो शायद ससुराल में उसकी कदर होती।
Pain not having Children | ससुराल में तानों का आरोप video में महिला आरोप लगाती है कि ससुराल में उसे बार-बार ताने सुनने पड़ते हैं। कथित तौर पर उससे कहा जाता है कि “अगर यह अच्छी होती तो औलाद का सुख जरूर देखती” या “अगर किस्मत अच्छी होती तो मां बन चुकी होती।” ऐसे शब्दों ने उसे अंदर तक तोड़ दिया है।
महिला बताती है कि वह भगवान से लगातार प्रार्थना करती है कि उसे भी एक संतान का सुख मिल जाए। उसका कहना है कि जब परिवार और समाज में किसी महिला को सिर्फ मां बनने की क्षमता से आंका जाता है, तो यह मानसिक रूप से बहुत पीड़ादायक होता है।
Pain not having Children | यह वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है। कई लोग महिला के समर्थन में सामने आए हैं और कह रहे हैं कि संतान होना या न होना पूरी तरह भगवान या प्रकृति की देन है। किसी महिला को इसके लिए दोषी ठहराना गलत है।

गाँव के लोगो का मानना है कि बांझपन या गर्भधारण में देरी केवल महिला से जुड़ा मुद्दा नहीं होता। कई मामलों में पुरुष स्वास्थ्य, तनाव, जीवनशैली और अन्य चिकित्सीय कारण भी जिम्मेदार हो सकते हैं। बावजूद इसके, समाज में अक्सर केवल महिला को ही जिम्मेदार ठहराया जाता है।
Pain not having Children | मानसिक दबाव और सामाजिक सोच ग्रामीण और पारंपरिक परिवारों में आज भी संतान को वंश चलाने और सामाजिक सम्मान से जोड़ा जाता है। ऐसे में जिन दंपतियों को संतान सुख देर से मिलता है या नहीं मिलता, उन्हें तानों और सामाजिक दबाव का सामना करना पड़ता है।
मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि लगातार अपमान और तानों से व्यक्ति अवसाद और आत्मसम्मान की कमी का शिकार हो सकता है। ऐसे मामलों में परिवार को सहयोग और समझदारी दिखानी चाहिए, न कि आरोप और ताने।
क्या कहता है कानून और समाज Pain not having Children भारत में महिलाओं के सम्मान और मानसिक उत्पीड़न के खिलाफ कानून मौजूद हैं। अगर किसी महिला को लगातार प्रताड़ित किया जाता है, तो वह कानूनी मदद ले सकती है। हालांकि, ज्यादातर महिलाएं पारिवारिक बदनामी के डर से चुप रहती हैं।
सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि ऐसे वायरल वीडियो समाज के सामने एक सच्चाई रखते हैं। यह जरूरी है कि परिवार संतान को ही सम्मान का आधार न बनाए, बल्कि महिला को उसके व्यक्तित्व और गुणों के आधार पर सम्मान दे।
महिला की अपील Pain not having Children – वीडियो में महिला ने भावुक अपील करते हुए कहा है कि वह किसी का बुरा नहीं चाहती, बस इतना चाहती है कि उसे भी समझा जाए। वह कहती है कि “हम भी इंसान हैं, हमारा भी दिल है।” उसकी यह बात कई लोगों के दिल को छू रही है।
Pain not having Children Viral video 2026
Pain not having Children | संतान न होने पर महिला का दर्द केवल एक परिवार की कहानी नहीं, बल्कि समाज की सोच का आईना है।
9 मिनट 9 सेकंड का यह वीडियो इस बात की याद दिलाता है कि किसी भी महिला की पहचान सिर्फ मां बनने से नहीं होती। सम्मान और प्यार हर इंसान का अधिकार है, चाहे उसके बच्चे हों या न हों।











