टीडीएस वायरलस न्यूज़, गोपालगंज/बिहार-गोपालगंज जिले के विशंभरपुर स्थित पावन गंडक नदी तट पर मौनी अमावस्या के पावन अवसर पर आस्था का अद्भुत नजारा देखने को मिला। सुबह से ही हजारों की संख्या में श्रद्धालु गंडक घाट पर पहुंचने लगे और पुण्य स्नान कर दान-पुण्य किया।
कड़ाके की ठंड, घना कोहरा और ठिठुरन भरी सुबह के बावजूद श्रद्धालुओं के उत्साह में कोई कमी नहीं दिखी। पूरा गंडक तट “हर-हर गंगे” और “जय गंडक मैया” के जयकारों से गूंज उठा।
सनातन धर्म में मौनी अमावस्या का विशेष महत्व माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन मौन रहकर नदी में स्नान, जप-तप और दान करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है तथा जीवन के कष्ट दूर होते हैं।
इसी आस्था के चलते गोपालगंज जिले के साथ-साथ पड़ोसी जिलों और उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती इलाकों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु विशंभरपुर गंडक घाट पहुंचे।
कई श्रद्धालु पूरी रात यात्रा कर भोर में घाट पर पहुंचे और उगते सूर्य के साथ पवित्र स्नान किया। सुबह होते-होते गंडक घाट पर श्रद्धालुओं की भीड़ और घनी हो गई। महिलाओं, बुजुर्गों और युवाओं के साथ-साथ बड़ी संख्या में बच्चे भी स्नान के लिए पहुंचे।
श्रद्धालुओं ने नदी में स्नान के बाद पूजा-अर्चना की, दीपदान किया और गरीबों व जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र और द्रव्य का दान कर सुख-समृद्धि की कामना की। कई लोगों ने मौन व्रत रखकर पूरे विधि-विधान से धार्मिक अनुष्ठान संपन्न किया।
मौनी अमावस्या के अवसर पर विशंभरपुर में भव्य मेले का भी आयोजन किया गया, जो श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रहा। गंडक तट के आसपास सैकड़ों अस्थायी दुकानें सजी रहीं।
मेले में बच्चों के खिलौने, घरेलू उपयोग की वस्तुएं, कपड़े, श्रृंगार का सामान, रसोई के बर्तन और फर्नीचर की दुकानें लगी थीं। महिलाओं में विशेष रूप से श्रृंगार के सामान और बर्तनों की खरीदारी को लेकर उत्साह देखा गया,
जबकि फर्नीचर की दुकानों पर सबसे अधिक भीड़ नजर आई। ग्रामीण इलाकों से आए लोगों ने अपने बेटी के विवाह और घरों के लिए कुर्सी, चौकी, पलंग और अन्य सामान खरीदे।
खान-पान की दुकानों पर भी दिनभर रौनक बनी रही। पारंपरिक मिठाइयों के साथ-साथ चाट-पकौड़े, समोसे, जलेबी की दुकानों पर लोगों की लंबी कतारें देखी गईं।
ठंड के मौसम में गर्म-गर्म चाय और पकवानों का आनंद लेते हुए श्रद्धालुओं ने मेले का भरपूर लुत्फ उठाया। बच्चों के लिए झूले और मनोरंजन के साधन भी लगाए गए थे, जहां दिनभर चहल-पहल रही।
भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन और स्थानीय पुलिस पूरी तरह मौजूद रही। गंडक नदी के गहरे पानी में किसी भी घटना को रोकने के लिए घाट पर बैरिकेडिंग की गई थी।
खतरनाक स्थानों पर स्नान पर रोक लगाई गई और श्रद्धालुओं को सुरक्षित स्थानों पर ही स्नान करने के लिए जागरूक किया गया था।

पुलिस बल के साथ-साथ स्थानीय स्वयंसेवक भी लगातार श्रद्धालुओं की मदद करते नजर आए। मेले परिसर और घाट क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रखी गई थी ताकि किसी भी तरह की अव्यवस्था या हादसे से बचा जा सके।
प्रशासन की ओर से साफ-सफाई, पेयजल और प्राथमिक चिकित्सा की भी व्यवस्था की गई थी। घाट पर जगह-जगह निगरानी रखी जा रही थी और लाउडस्पीकर के माध्यम से लोगों को सावधानी बरतने की अपील की जा रही थी।
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि पूरे आयोजन के दौरान शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए पर्याप्त बल की तैनाती की गई थी और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए प्रशासन पूरी तरह तैयार था।
मौनी अमावस्या के अवसर पर विशंभरपुर गंडक तट पर आस्था, परंपरा और उत्सव का अद्भुत संगम देखने को मिला।
श्रद्धालुओं ने धार्मिक अनुष्ठानों के साथ-साथ मेले का आनंद उठाया और दिनभर पूरा इलाका भक्तिमय माहौल में डूबा रहा। प्रशासन और स्थानीय लोगों के सहयोग से यह आयोजन शांतिपूर्ण और सफल रहा, जो आने वाले वर्षों में भी इसी आस्था और उल्लास के साथ मनाया जाता रहेगा।







